Saturday, June 28, 2014

प्रभात-पारुल सीरीज : गन्दी बातें और चुदाई



    आग दोनों तरफ भड़क चुकी थी और दोनों ही अगले दिन का इंतज़ार बे-शबरी से कर रहे थे. एक-एक पल काटना मुश्किल हो रहा था. और आखिर में वह पल आ ही गया.
    
   पारुल के आने से पहले ही प्रभात ने अपने गुप्त-अंगों को अच्छी तरह से साफ़ कर लिया था, क्योंकि उसे पूरा यकीन था कि आज वह पारुल को जरूर चोदेगा और पारुल भी जरूर चुदवायेगी।
 
    जैसे ही पारुल का आना हुआ, प्रभात बाथरूम में चला गया. कोई 2 मिनट के बाद वापस आया और बुक लेकर स्टडी शुरू कर दी. पारुल उसे गुस्से में घूरे जा रही थी. पारुल को इस तरह घूरते हुए देखकर बोला, "क्या हुआ पारुल? आज पढ़ना नहीं है क्या?"
इतना सुनकर पारुल का पारा और भी चढ़ गया. वह तो आज बहुत ही उत्तेजित थी कि आज बहुत चुदेगी, परन्तु ये क्या प्रभात तो कुछ और ही अवश्था में है, वह चिड कर गुस्से में बोली, "नहीं मुझे नहीं पढ़ना। मैं जा रही हूँ. तुम ही पढ़ो आज."

   tSls gh ik:y mBdj tkus dks gqbZ] izHkkr us mldk gkFk idM fy;k vkSj cksyk] ^^D;ksa\ vkt I;kj ugha djksxh\**

  ik:y pqi jghA izHkkr us mlds gksBksa ij vius gksB j[k fn;s vkSj mUgSa pwlus yxkA ik:y Hkh mldk lkFk nsus yxhA /khjs”/khjs nksuksa ,d”nwljs esa lekus yxsA nksuksa us ijLij tdMk gqvk FkkA ,slk yx jgk Fkk tSls ,d”nwts esa foyhu gksuk pkg jgs gksaA rHkh izHkkr cksy iMk] ^^ik:y! esjs t+T+ckr esjs lcz ls ckgj gks jgs gSaA eSa dqN djuk pkgrk gwWaA**
ik:y” ^^D;k djuk pkgrs gks\**
izHkkr” ^^rqe cqjk rks ugha ekuksxh\**
ik:y” ^^ugha] fcYdqy ugha**
izHkkr” ^^eSa rqEgSa pksnuk pkgrk gwWaA**

   ik:y pksnuk ’kCn lqudj izHkkr ls cqjh rjg fyiV x;h vkSj dku esa /khjs ls cksyh] ^^pksn yks uk] jksdk fdlus gS\ eSa [kqn rqe ls pqnokuk pkgrh gwWaA vkt rqe eq>s bruk pksnks fd esjk iwjk cnu nnZ djus yxs vkSj esjh pwr rqEgkjs y.M dh cjlkr ls r`Ir gks tk;sA cgqr I;klh gS esjh pwr bls vius y.M ls bruk ihVks fd ;s fQj ls eq>s u rM+ik;sA**


izHkkr” ^^ik:y ,d ckr crkvks] rqeus ;s xUns ’kCn dgkWa ls lh[ks\**                   
ik:y+” ^^rqEgkjh fdrkc lsA ,d fnu tc eSa dkWfyt ugha x;h Fkh vkSj rqe ;gkWa ugha FksA eSa cksj gks jgh Fkh rks rqEgkjs dejs esa pyh vk;h Fkh vkSj rqEgkjh fdrkcksa dks VVksyus yxh rks eq>s ,d lsDlh fdrkc feyh vkSj mls i<+us yxhA mlh esa ;s xUns ’kCn fy[ks gq, FksA i<+rs”i<+rs esjk eu mlh le; pqnokus dk gksus yxk FkkA vxj rqe gksrs rks eSa rHkh rqels pqnok;s fcuk ugha jgus okyh ugha FkhA**
izHkkr” ^^vPNk rks fQj dSls pqnokvksxh\**
ik:y” ^^fcYdqy iksuZ fQYe dh rjg pksnuk eq>sA esa viuh igyh pqnk;h dks ;knxkj cukuk pkgrh gwWaA eSa ph[kwWa fpYykmWa rc Hkh rqe :duk ughaA eq>s xUnh”xUnh xkfy;kWa nsrs gq, pksnukA**

   bruk lqurs gh izHkkr us ik:y ds dims mrkjuk ’kq: dj fn;k vkSj mlds cnu ij dsoy iSaVh dks jgus fn;k D;kasfd og pwr ij Mk;jsDV vVSd ugha djuk pkgrk FkkA og leM pqdk Fkk fd ik:y bl le; iwjh rjg xeZ gS vkSj dksbZ Hkh nsj djuk [kqn dk uqdlku djuk Fkk blfy, mlus fcuk dksbZ nsj fd, vius Hkh dims gVk fn;s flQZ vUMjfo;j dks NksM+djA mlus ik:y dks csM ij fyVk fn;k vkSj [kqn mldh cxy esa ysVdj mldks fdl djrs gq, mlds mHkkjksa dks elyus yxkA ik:y ds Lruksa esa ruko vkus yxk vkSj og eqX/k gksus yxhA izHkkr mlds iwjs ’kjhj ij viuh thHk ls jfrdzhMk;sad dj jgk Fkk vkSj iSaVh ds mij ls gh mldh pqr dks lgyk jgk FkkA mldh pwr xhyh gksus yxh Fkh vkSj og vkuUn esa flldkjrs gq, viuh dej dks fgykus yxh FkhA rHkh izHkkr us viuh gjdrsa cUn dj nhaA ik:y ls ugha jgk x;k rks cksy iMh] ^^izHkkr D;k gqvk\ :d D;kas x;s\ Iyht+ djks u vc jgk ugha tk jgkA**


izHkkr” ^^igys rqe esjk y.M pqlks] rc dqN d:Waxk vkSj iwjk et+k Hkh nwWaxkA**
ik:y” ^^vksds! vkt rqe tks dgksxs d:Waxh D;ksafd bl iy dks eSa ;knxkj cukuk pkgrh gwWaA**

   vkSj rqjar mlus izHkkr ds y.M dks eqWag esa ys fy;k vkSj ykSyhikWi dh rjg pwlus yxhA og ;g lc igyh ckj dj jgh Fkh fQj Hkh vPNh ijQkWeZ dj jgh FkhA ,d rks igyh pqnkbZ   mij ls ik:y dk eknd cnu izHkkr dks dUVzkWy ls ckgj fd;s tk jgk Fkk blfy;s izHkkr tYnh gh fi?ky x;kA og dqN cksy ikrk ml ls igys gh mldk ykok ik:y ds eqWag esa fudy x;kA ik:y Hkh bl le; iwjh j.Mh ds tSlk O;ogkj dj jgh Fkh vr“ mlus iwjk dzhe ih fy;kA vc izHkkr us ik:y dks cSM iVd fn;k vkSj mlds cnu dk cqjh rjg ls enZu djrs gq, mldh Vkaxksa ds chp esa vk x;kA tSls gh mlus iSaVh dks gVkdj mldh pwr ij viuh t+hHk j[kh] ik:y dh flldkfj;ka iwjs dejs esa xwatus yxhaA dqN gh iy esa ik:y dk ’kjhj vdM+us yxk vksj mldh pwr us jl dh /kkj NksM+ nhA izHkkr yxkrkj pwr dks pkVrk jgk vkSj ik:y dks rM+ikrk jgkA ik:y vkxzg djrs gq, cksyh] ^^izHkkr! Iyht+] vc er rM+ikvksA viuk y.M Mky nks esjh pwr esa vkSj QkM+ Mkyks esjh pwr dksA pksn”pksndj bldk HkkslM+k cuk nks**

 ik:y मचल रही थी] उसकी चूत की खुशबू भी शानदार थी। थोड़ी देर चूसने के बाद izHkkr us अपना 8 bap yEck vkSj 4 bap eksVk लंड ik:y की चूत में डालना शुरू किया।
ik:y को दर्द हो रहा था पर वो कह रही थी- ^^जल्दी से डाल दो !**
izHkkr us ik:y की कमर के नीचे तकिया लगाया और उसने अपनी टांगें izHkkr ds कंधों पर रख दी] धीरेधीरे उसकी चूत में izHkkr dk लंड सरकाने लगा। ik:y dh pwr cgqr VkbV FkhA mldh pwr ls [kwu vkus yxk Fkk vkSj mldk y.M [kwu ls yky gks x;k FkkA कुछ ही देर में izHkkr dk पूरा लंड उसकी गोरी योनि में घुस गया।
ik:y चिल्ला उठी- ^^आ आआ आअ ! प्लीज izHkkr ! धीरे करो ! मैं मर जाऊँगी !**

izHkkr cksyk+” ^^rw rks dg jgh Fkh fd eq>s j.Mh dh rjg pksnuk] vc rks rq>s bruk nnZ nwWaxk fd ges’kk ;kn j[ksxhA आज तू मेरी कुतिया हैऔर तेरी चूत मेरे लंड की दासी."

और izHkkr ज़ोर ज़ोर से धक्के मारने लगा। प्रभात इतना बे-रहमी से उसको चोद रहा था की पारुल रोने लगी थी. एक तो कुंवारी चूत, पहली चुदाई, और 8 इंच का लंड. पहली चुदाई में इतना लम्बा और मोटा लंड पारुल सह नहीं प् रही थी, परन्तु करती भी क्या क्योंकि लंड अब तो उसकी चूत को फाड़ चूका था. कुछ देर बाद जब दर्द काम हुआ तो उसको आनंद आने लगा था. उसकी सिसकारियाँ निकल रही थी मजे से ! nksuksa लोगों ने खूब मजा लिया pqnkbZ का ! फ़िर izHkkr ने अपना रस उसकी चूत में ही डाल दिया।

pqnkbZ करने के बाद ik:y का मुंह एकदम लाल हो गया था] उसकी आँखों से आँसू निकल रहे थे।

पढ़िए आगे की कड़ी-  प्रभात-पारुल सीरीज : कल की चुदाई और नये आसन

Friday, May 10, 2013

सेक्स के फायदे


यह तो हम सभी जानते हैं कि सेक्स न केवल आनंददायक और रिश्तों  को मज़बूत बनाने वाला होता है बल्कि यह हमारे स्वास्थ्य  के लिए भी फायदेमंद होता है। लेकिन यह किस तरह से फायदेमंद है इसे जानना शायद आपके लिए आश्चर्यभरा हो सकता है। जो इसे नहीं समझते कि यह सम्पूर्ण जीवन तथा सम्बन्धों की गुणवत्ता  के लिए काफी फायदेमंद हो सकती है उनके लिए लैंगिक संभोग की क्रिया अभी भी बहुत लोगों के लिए परेशानी और घृणा का विषय होती है। निम्न कुछ बाते अच्छे सेक्स सम्बन्धों को काफी फायदे पहुंचाता है:

सेक्स- एक तनाव मिटाने वाली दवा
सेक्स निम्न रक्त चाप में मस्तिष्क और शरीर का तनाव घटाने में मदद करता है। नियमित सेक्स करने से आपका शरीर तनावपूर्ण दशाओं का बेहतर सामना करने के लिए तैयार होता है और आपका ब्लड प्रेशर बढ़ने नहीं देता। तनाव का सामना करने के लिए सेक्स क्रिया का प्रवेश (योनि में लिंग का प्रवेश) होना ज़रूरी नहीं है दूसरी सेक्स गतिविधियाँ जैसे आलिंगन और अंतरंग गर्माहट के पल भी मददगार हो सकते हैं। सेक्स के दूसरे रूपों के बजाय प्रवेश्न सेक्स अधिक रिलैक्स करने वाला और तनाव दूर करने वाला होता है। मानवीय शरीर का निकट स्पर्श बहुत आरामदायक होता है जो सुरक्षा की अनुभूति कराता है। इससे आपको रोजमर्रा के जीवन में स्थितियों का  बेहतर ढंग से सामना करने में मदद मिलती है।

सेक्स- एक व्यायाम के रूप में
सेक्स एक बेहतरीन व्यायाम की तरह आपके लिए लाभदायक है क्योंकि सेक्स के दौरान आपके शरीर की सभी मांसपेशियां खिंचती और खुलती हैं। सेक्स आपकी अतिरिक्त  कैलोरी जलाने में भी मदद करता है और यह व्यायाम करने का सबसे आनंददायक तरीका है। पूरी क्षमता से की गई एक बार सेक्स क्रिया से उतनी कैलोरी जल जाती है जितनी कैलोरी पन्द्रह मिनटों तक ट्रेड मिल पर ब्रिस्क वॉक करने पर खर्च होगी।

सेक्स हृदय के स्वास्‍थ्‍य के लिए लाभकारी
सेक्स रक्त संचार सुधारता है और कोलेस्ट्रॉल का स्तर ठीक करता है। सेक्स क्रिया के दौरान हृदय तेज गति से धड़कता है और ज़्यादा मात्रा में रक्त को पम्प  करता है जिससे रक्त संचार तेज होता है। सप्ताह में एक बार सेक्स़ करने से आपके लिए हृदयाघात (हार्ट अटैक) से पीड़ित होने का खतरा कम हो जाता है।

सैक्स फीलगुड का अहसास कराए
सेक्स  सामान्य तंदुरूस्ती को बढ़ाता है और आपके आत्मविश्वास के स्तर को बढ़ा देता है। निरर्थक सेक्स प्यार भरे सेक्स  की तरह कारगर नहीं होता। अध्ययनों से पता चला है कि शादीशुदा या एक दूसरे के प्रति वफादार जोड़े बेहतर संतु‍ष्ट जीवन बिताते हैं। आपसी वफादारी और घनिष्ठता से आपको भावनात्मक सुरक्षा का अहसास होता है और आंतरिक खुशियां मिलती हैं। प्यार भरे इन क्षणों के दौरान आपको अपने साथी के लिए प्यार और महत्वपूर्ण होने का अहसास आपकी आत्म-प्रतिष्ठा को भी बढ़ा देता है।

सेक्स-एक रिश्ते मज़बूत बनाने वाला अनुभव
आपको प्यार करने वाले जोड़ीदार (पार्टनर) की निकटता और चरमसुख की ओर बढ़ने का आनंद दोनों मिलकर "प्यार के हॉर्मोन" ऑक्सीटोसिन का स्तर बढ़ा देते हैं जिससे आपसी सम्बन्ध और रिश्ते मज़बूत होते हैं। अच्छे  सेक्स से लम्बे समय के रिश्तों में महबूती आती हैं ।

सेक्स जो प्रतिरोधी क्षमता मज़बूत करे
सेक्स आपके प्रतिरक्षा तंत्र (इम्यून सिस्टम) को मज़बूत करके आपको संक्रमणों और बीमारियों से बचाए रख सकता है। एक सप्ताह में एक या दो बार सेक्स  करने से सामान्य सर्दी जुकाम और दूसरे संक्रमणों से आपको सुरक्षा मिलती है।

सेक्स दर्दनिवारक (पेनकिलर) के रूप में
सेक्स ऑक्सीटोसिन हॉर्मोन का स्तर बढ़ाता है जिसके परिणामस्वरूप एंडॉर्फिन्सक या "हैप्पी  हॉर्मोन" रिलीज होता है। एंडॉर्फिन्सक दर्द से छुटकारा दिलाने में मददगार है जिससे सिरदर्द, जोड़ों के दर्द और यहां तक कि मासिक पूर्व लक्षणों में भी राहत मिलती है।

लंड चूसने की विधि-2


लंड चूसने के लिए उससे प्यार होना ज़रूरी है। अगर लंड को प्यार से देखोगे और उसे प्यार से सहलाओगे तो तुम्हें लंड अच्छा लगने लगेगा। जो चीज़ अच्छी लगती है उसे आसानी से चूमा जा सकता है। चूसने की शुरुआत करने के लिए अपनी पसंद का आसन ग्रहण करके अपने को आरामदेह अवस्था में कर लो। मेरी राय में दूसरा या तीसरा आसन ठीक रहेगा।

लंड को हाथ में लेकर उसको सहलाने के बाद उसे अपने मुँह के पास ले आओ और उसको नजदीक से देखो तथा उसकी गंध को महसूस करो। तुम्हें यह अच्छा लगेगा। अब उसको अपने होटों से चूमना शुरू करो। लंड की छड़ से शुरू करना ठीक रहेगा और पहले नीचे की तरफ अंडकोष तक छोटी छोटी पुच्चियाँ लेने के बाद ऊपर की तरफ सुपारे तक पुच्चियाँ करो। यह शुरू की पुच्चियाँ सूखी हो सकती हैं। पुच्चियों से पूरा लंड ढकने के बाद जीभ से लंड की छड़ को चाटना शुरू करो। ऐसा करते वक़्त जीभ गीली होनी चाहिए जिससे लंड गीलापन महसूस करे। लंड के छड़ का निचला हिस्सा काफी मार्मिक होता है और जीभ के स्पर्श से लड़के को बहुत उत्तेजना मिलेगी। लंड की छड़ को सब तरफ से अच्छी तरह से चाट-चाट कर गीला कर लो। और फिर उसके सुपारे को अपने होटों के बीच में लेकर उसकी चुम्मी ले लो। ज्यादातर लंड ऐसा करने से अपनी शिथिल अवस्था त्याग कर बढ़ने लगेंगे।

अब सुपारे को हल्के से होटों से पकड़ लो और जीभ को पैना करके से उसके शीर्ष पर छोटे-छोटे वार करो। चार-पांच बार वार करने के बाद जीभ को सुपारे के चारों ओर घुमाओ। अगर लंड अभी भी शिथिल अवस्था में है तो उसे एक हाथ से पकड़ कर रखो पर अगर वह कड़क हो गया है तो हाथों से पकड़ने की ज़रुरत नहीं है। जब लड़की लंड को केवल मुँह से नियंत्रण में रखती है तो ज्यादा आनंद आता है।

सुपारे के चारों तरफ तीन-चार बार जीभ घुमाने के बाद लंड को मुँह में लेने का समय आ जाता है। अगर शिथिल है तो लंड को मुँह में लेने में लड़की को आसानी भी होती है और मज़ा भी आता है। मज़ा इसलिए ज्यादा आता है क्योंकि पूरा लंड अन्दर ले पाती हैऔर फिर जब लंड जोश में आता है तो मुँह के अन्दर ही उसकी वृद्धि होती है जो कि लड़की महसूस कर सकती है। लंड की अवस्था के अनुसार उसे जितना मुँह में ले सको ले लो और फिर अपना सिर हिला कर लंड को मुँह से अन्दर-बाहर करो। इससे लड़के को चुदाई का सा मज़ा आएगा।

जब लंड मुँह में जाने लगे तो जीभ से सुपारे के छेद को छूने से लड़का मतवाला हो जायेगा। बाहर निकालते वक़्त जब सिर्फ सुपारा मुँह में रह जाए तो मुँह को बंद करके उसको जकड़ लो जिससे बाहर न आ सके। इस तरह मुँह से चोदने में लड़के को बहुत मज़ा आएगा और तुम्हें भी अच्छा लगेगा। अगर मुँह थक जाये तो लंड को मुँह से बाहर निकाल कर उसकी छड़ को होटों और जीभ से प्यार कर सकती हो और चाट सकती हो।

ज्यादातर लड़कों को चुसवाने के समय सूखापन अच्छा नहीं लगता इसलिए लंड को अपने मुँह से गीला रखना चाहिए।

चूसने में विविधता

लंड को लॉलीपॉप की तरह भी चूस सकते हैं। इसमें विविधता लाने के लिए और चूसने में और मज़ा लाने के लिए कई तरह के फेर-बदल कर सकते हैं। लंड के सुपारे पर शहद, जैम, आइस क्रीम, या कोई भी ऐसी चीज़ जिसका स्वाद तुम्हें पसंद हो, लगा सकते हैं और फिर उसको चूस सकते हैं। इस से लड़के और लड़की दोनों को मज़ा आ सकता है। लंड चुसवाने में लड़कों का आत्म-नियंत्रण सामान्य सम्भोग के मुकाबले जल्दी ख़त्म हो जाता है क्योंकि इसमें उन्हें ज़्यादा सुख का अनुभव होता है। अतः वे जल्दी ही वीर्य-पात कर देते हैं।

वीर्य का क्या करें?

बहुत सी लड़कियों को यह समझ नहीं आता कि वीर्य का क्या किया जाये। जहाँ तक लड़कों का सवाल है वे तो यही चाहते हैं कि जब वे चरमोत्कर्ष पर पहुंचें और अपना लावा लड़की के मुँह में उगलें तो लड़की उस लावे को मुँह में न केवल ग्रहण करे बल्कि ख़ुशी-ख़ुशी उसे पी भी जाये। इस अकेले कार्य से लड़कों को सेक्स की सभी क्रियाओं के मुकाबले में से सबसे ज्यादा ख़ुशी मिलती है। एक तो ख़ुशी इस बात की कि उनका वीर्य लड़की ग्रहण कर रही है और दूसरी बात यह कि वीर्य स्खलन के वक़्त लंड मुँह से निकालने की ज़रुरत नहीं होने से चरमोत्कर्ष के आनंद में कोई बाधा या रुकावट नहीं होती। वे अपना आनंद बिना रोक-टोक के उठा पाते हैं। अगर लड़की वीर्य-पान नहीं करती तो सबसे आनंदमयी मौके पर लड़के को लंड बाहर निकालना पड़ता है और इससे उसके सुख में विराम लग जाता है।

मेरी राय में तो लड़कियों को वीर्य-पान कर लेना चाहिए। एक तो ऐसा करने से वे अपने प्रेमी के ऊपर बहुत बड़ा उपकार कर देंगी जिसका बदला वे किसी और रूप में निकाल सकती हैं। दूसरे, वीर्य को पीने से इधर-उधर इसका छिड़काव नहीं होगा जिसको बाद में साफ़ नहीं करना पड़ेगा।

वीर्य को पीने से कोई हानि नहीं है; बल्कि देखा जाये तो इसमें तरह तरह के पौष्टिक पदार्थ प्रोटीन होते हैं। हाँ, इसको पीने के लिए इसके स्वाद को पसंद करने की ज़रुरत होगी जो कि आसानी से विकसित की जा सकती है।

कहते हैं, हमें खाने में वे ही चीज़ें पसंद आती हैं जो हम बार बार खाते हैं। इसीलिए जो खाना हमें पसंद आता है वह अंग्रेजों को पसंद नहीं आता क्योंकि उन्होंने यह खाना बार बार नहीं खाया होता। बार बार कोई चीज़ खाने से उसके लिए जीभ में स्वाद पैदा हो जाता है और वह हमें अच्छी लगने लगती है। यही बात हमारे संगीत के प्रति रूचि के लिए भी लागू होती है। जो गाने हम बार बार सुन लेते हैं वे अच्छे लगने लगते हैं।

तो वीर्य के स्वाद को पसंद करने के लिए ज़रूरी है कि इसे बार बार पिया जाये। इसका स्वाद ज्यादातर माँ के दूध की तरह नमकीन सा होता है और इसमें एक अनूठी गंध होती है जो कि कई लड़कियों को कामुक लगती है। हो सकता है पहली बार इसका स्वाद और गंध अच्छा ना लगे पर एक-दो बार के बाद ठीक लगने लगेगा और फिर बाद में तो स्वादिष्ट लगने लगेगा।

तो लड़कियों को चाहिए कि वीर्य-पान की आदत डालें जिससे उन्हें भी अच्छा लगे और उनके प्रेमी को भी वश में कर सकें। बस एक-दो बार इसका पान करने से झिझक निकल जायेगी और फिर कोई दिक्कत नहीं आएगी। मुझे तो वीर्य-पान में कोई भी नुक़सान नज़र नहीं आता।

पूरे लंड को निगलना

(लिंग का गले के अन्दर तक पहुँचाना)

जब लंड चूसने में थोड़ी महारत हासिल हो जाए तो अगली क्रिया है पूरे लंड को निगलना। इसके लिए जो पहले अभ्यास बताये गए हैं वे करने बहुत ज़रूरी हैं क्योंकि इसमें सफलता हासिल करने के लिए मुँह में लंड के समावेश की क्षमता बढ़ानी होगी। अगर औसत मुँह और औसत लंड के माप देखे जाएँ तो ज्यादातर लड़कियां लंड निगलने में कामयाब हो जाएँगी। ज़रुरत है तो बस दृढ़ निश्चय और आत्मविश्वास की। इसमें लड़कों के सहयोग की बहुत ज़रुरत होगी क्योंकि उन्हें धीरज से काम लेना होगा और अपने ऊपर नियंत्रण रखना होगा। अगर वे जल्दबाजी करेंगे तो लड़की का गला घुट सकता है। इस क्रिया को लड़की की मर्ज़ी के मुताबिक ही करना चाहिए।

आसन

इस क्रिया के लिए पहला या चौथा आसन उपयुक्त रहेंगे। शुरू-शुरू में आसन पहला ही बेहतर रहेगा क्योंकि इसमें लड़की पूरी कार्यवाही पर नियंत्रण रख सकती है। जब थोड़ा अनुभव हो जाये तो चौथाआसन इस्तेमाल कर सकते हैं जिसमें लड़का चाहे तो थोड़ा आक्रामक रवैया अपना सकता है।

विधि

लड़की को अपना मुँह पूरा खोलना चाहिए और अपनी जीभ चपटी करके जितना बाहर निकाल सकती है, निकाल कर लंड को मुँह में लेना चाहिए। अब धीरे धीरे लंड को जितना ज़्यादा अन्दर ले सकती है लेने की कोशिश करनी चाहिए। लड़का इसमें उसकी मदद कर सकता है। उसे चाहिए कि बिना जोर-जबरदस्ती किये लंड को अन्दर डालने में सहयोग करे। शुरू में लड़की को ऐसा लग सकता है कि उसके लिए पूरा लंड निगलना मुमकिन नहीं है। पर कोशिश करने से सफलता मिल जायेगी यदि लंड बहुत ज़्यादा बड़ा ना हो।

लंड जितना अन्दर हो सकता है, उतना लेने के बाद उसे बाहर निकाल लो। फिर पिछली बार के मुकाबले थोड़ा और ज़्यादा अन्दर लेने कि कोशिश करो और फिर बाहर निकाल लो। इसी तरह धीरे-धीरे प्रगति करते हुए लंड को पूरा निगल सकते हैं। ध्यान रहे कि सिर्फ मुँह के अन्दर केवल छोटा या शिथिल लंड ही आ सकता है। औसत आकार का उत्तेजित लंड सिर्फ मुँह में नहीं समां सकता। उसे पूरा अन्दर करने के लिए उसे गले में उतारना होगा। शुरू में यह ना-मुमकिन लगता है पर इतना कठिन नहीं है। लेकिन अगर लंड का माप अत्यधिक बड़ा है या फिर लड़की छोटी है तो ज़बरन यह क्रिया नहीं करनी चाहिए। लंड को किस हद तक अन्दर ले सकते हैं, इसका निर्णय लड़की पर छोड़ देना चाहिए। अगर वह सुखद महसूस नहीं कर रही तो रोक देना चाहिए।

उन्नत तकनीक

जब इस तरह लंड चूसने में दक्षता हासिल हो जाए और जब इसमें भी कोई तक़लीफ़ ना हो तो अगले चरण की तरफ बढ़ सकते हैं। इसमें लड़का लड़की के मुँह की चुदाई करता है। इसके लिए चौथा या पाँचवा आसन इस्तेमाल कर सकते हैं लेकिन सबसे कारगर चौथा आसन है क्योंकि इसमें लड़का सबसे ज्यादा गहरा प्रवेश पा सकता है और अपने वारों पर नियंत्रण कर सकता है। इस क्रिया में लड़की का कोई नियंत्रण नहीं होता और उसकी भूमिका एक शांत प्राप्तकर्ता की होती है। उसे अपने आदमी की ख़ुशी के लिए उसके वारों को ख़ुशी से झेलना चाहिए। अगर आदमी के वार सहन ना हो सकें तो उसे बता देना चाहिए ताकि वह नियंत्रित हो जाये। लड़कों को चाहिए कि अपनी ख़ुशी के नशे में वे अपने साथी की भावनाओं और ख़ुशी का ध्यान रखे और उसे तकलीफ ना पहुंचाए। उसे यह नहीं भूलना चाहिए की वह लड़की के मुँह को चोद रहा है, उसकी चूत को नहीं।

निष्कर्ष

मुझे आशा है इस विधि को इस्तेमाल करके लड़के-लड़कियां एक बहुत ही मज़ेदार और सुखदायक क्रिया का आनंद उठा पाएंगे। लड़कियों को चाहिए की वे लंड से प्यार करना सीख लें और लड़कों को चाहिए कि अपने लिंग को साफ़ रखें और लड़की की इच्छाओं का सम्मान करें।

सबको लंड चूसने और चुसवाने की शुभ-कामनाएंl

Monday, May 6, 2013

सेक्सी कैसे दिखें (लड़कों के लिए टिप्स )?

क्या आपकी क्लास में बहुत सुन्दर लड़की है, जिससे आप दोस्ती करना चाहते हैं?
क्या आपके ऑफिस में कोई है, जिसकी तरफ आप खींचे चले जाते हो?
तो यहाँ मैं आपको कुछ ऐसे टिप्स देने जा रहा हूँ, जो आपकी पर्सनालिटी को सेक्सी और attractive बना देंगे---

A . आत्मविश्वास (कॉन्फिडेंस)
1. अपने आप में आत्मविश्वास पैदा करें- यह कोई रहस्य नहीं है की लोग उनको ही पसंद करते हैं जिनमे आत्मविश्वास होता है. 

Sunday, May 5, 2013

मेरा लण्ड

मेरा लंड सुशुप्त अवस्था में, कल्पना करो जब पुर्णतः खड़ा होगा तब क्या रंगत होगी?
आप में से किस-किस को चाहिए आज की रात ?